विद्यार्थि का जीवन।

इंसान जब होता पैदा,
तभी से सीखना चालू करता,
और विद्यार्थि बन जाता,
शायद इसीलिए इंसान को सबसे बुद्धिमान कहा जाता।
पहले उसके गुरु मां-बाप होते,
वो उसे संस्कार देते,
फिर वो स्कूल में कदम रखता,
टीचर और उसके सहपाठी,
उसको करते प्रेरित,
वो होता जिज्ञासु,
तुरंत सबकुछ ग्रहण करता,
उसका दिमाग छाननी के माफिक होता,
जो उससे संबंधित,
याद रहता,
बाकि छिन जाता,
ये सिलसिला ताउम्र चलता।
अगर है कोई समझदार,
तो वो खूब मेहनत करता,
इनडोर आउटडोर सब परखता,
अपने दिमाग के चक्षुओं को बढ़ाता,
बहुत तर्क वितर्क करता,
बहुत से प्रयोग करता,
फिर कई निष्कषों पे पहुंचता,
आखिर अपने जीवन के सिद्धांत बनाता,
उन जीवन मुल्यों पे चलता।
अगर ये मुल्य सही,
तो जीवन की बुलंदियों को छूता,
कई कीर्तिमान स्थापित करता,
एक संपूर्ण मानव बनकर उभरता‌।
अगर उसके मुल्य नहीं ठीक,
तो फिर असफल हो जाता,
समाज में उपहास का कारण बनता,
हर कोई उससे पीछा छुड़ाता,
दर-दर की ठोकरें खाता,
कहीं का नहीं रहता,
आखिर जीवन असफल हो जाता।
परंतु जीवन में मौके आते कई बार,
अगर सुधर जाता,
नये मुल्यों का आचरण करता,
फिर से खूब मेहनत करता,
और कामयाबी के शिखर पे पहुंच जाता।
लेकिन महत्वपूर्ण,
कभी हिम्मत मत हारो,
अर्जुन की तरहां,
नजर मछली की आंख पे रखो,
और कोई कसर मत छोड़ो।

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बेहद प्यारी और खूबसूरत रचना। :heart_eyes::two_hearts: