मोहताज़

सो जाती है माँ की गोद में, उसे नर्म बिस्तर की तलाश नहीं
ये गरीबी है साहब इसमें खुशिया पैसो की मोहताज़ नहीं।।

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सच हैं आज के जमाने का।