बन्दी अच्छी हूं बस कभी-कभी ख़ुद से यूँही नाराज़ हो जाती हूँ

ये अधूरी ख्वाइशों से मैं यूं ही बेचैन हो जाती हूं ,
तुम बुरा मत माना करो मेरे बर्ताव का
बन्दी अच्छी हूं बस कभी-कभी ख़ुद से यूँही नाराज़ हो जाती हूँ ।।

मोटिवेशनल बातें सुनकर लगता है सब ठीक तो है ,
फिर शाम होते-होते वहीं पुरानी बातें दोहराती हूं ,
आगे बढ़ते-बढ़ते खुदको फिर उसी जगह में पाती हूं ।।

मुझे बोरिंग मत समझना , बस थोड़ी जल्दी बड़ी हो गयी थी कम उम्र में, इसलिये बात-बात पर समझदारी बताती हूं ,शायद इसलिये तुम सब जितनी बेफिक्र नहीं बन पाती हूं ,बन्दी अच्छी हूं बस कभी-कभी ख़ुद से यूँही नाराज़ हो जाती हूँ ।।

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