तेरी मोहब्बत मैं

बिस्तर की बातें बिस्तर पे छोड़ के,
बैठ गयी हूँ आज मंडप में ये लिवाज़ ओढ़ के।
एक दर्द है इस दिल में की तू मिला नहीं,
शुरू से वाकिफ़ थी इस हक़ीकत से,
…तो तुझसे गिला नहीं।
नज़दीकियाँ हमारी किस से छुपी हैं?
ये दूरियां भी तो कहाँ हमें खली है
तू आज खड़ा है सामने अनजान बन कर।
अपनी जान की शादी में मेहमान बन कर।
हर रस्म से तेरी आँखें कुछ नम सी हैं,
जैसे मेरे होंठों पर मुस्कुराहट शबनम सी हैं।
रोयेंगे नहीं ये वादा किये हैं,
जिसे पूरा करने का आज इरादा किया है।
मुश्किल है थोड़ा पर निभा लेंगे,
उसकी सेज पर हम ख़ुद को सजा लेंगे।।

©Ashi Gupta

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Very pure writing :heart_eyes:

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It’s very nice and really enjoy reading it.
@Aashi_Gupta great job done

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यह वास्तव में आश्चर्यजनक है

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Touched… Behad hi khoobsurat…
I would to read your work more.
Keep writing and sharing…

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Shukariya :blush:

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