आज से तू आजाद हैं!

तन्हाई खुले में चीखती हैं , अना इतरा के चलती है , हाय! ये जिंदगी कुछ यूँ बर्बाद हैं।

पिंजरे में मुझे डाल कर , बेड़ियों को मेरे खोल कर एक शख्स कहता है, आज से तू आज़ाद हैं!

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Bahut khoob dost, bahut khoob

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Shukriya