मेरी फुलझड़ी में तेरा पटाखा

दिल का दिया कब से जलाया हैं।

हमने खुद को सिर्फ़ तेरे लिए सजाया हैं ।

चक्री की तरह घूमा हूँ तेरे खातिर ।
अनार की तरह सब कुछ तुझपे लुटाया हैं ।

मेहताब सा जला हूँ तुझे रौशन करने को ।
अपना सुतलीबम वाला रूप कितनो को दिखाया हैं ।

इस दीवाली दिल की कर दो मेरी फुलझड़ी

तू जानती हैं कितने पटाखों का मुझपे साया हैं ।

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