फ़ुज़ूलयात में ।। (या एहसास में )

यूँही देर रात में।
कुछ ख़ास नहीं फ़ुज़ूलयात में ।

क्यों आज भी ?
मेरी हर बात में ।
ग़फ़लत में या , होश के हालात में।
अंधेरो में या , यादों के घेरो में ।

क्यों ऐसा लगता हैं ?

**हो यही कही मेरे आस पास में **
ना जाने किस ताक में ।

आज भी देर रात में।।
**ज़िक्र तेरा हो जाता हैं **
फ़िक्र तरी हो जाती हैं ।

यूँही
फ़ुज़ूलयात में ।।।

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शानदार जी

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Shukriya shukriya