साँवली ज़ुल्फ़ें , हया से मिलके।।

वो सादगी में भी क़हर ढाती हैं ।
सर्द की पहली धूप सी नज़र आती हैं ।

सांवली जुल्फ़े ।
हया से मिलके ।
जो वो खुल के मुसकुराती हैं ।

जिससे भी मिलती हैं,
जीने का मकसद दे जाती हैं ।
ऐसी मिसाल हैं वो , जो आजकल कम पाई जाती हैं ।

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Marvelous!

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