आराम करते हैं

आज मुश्किल ही सही चलो एक काम करते हैं
बीत गए हैं अर्से कई चलो आराम करते हैं

खै़रियत की खबर से क्यों भाई अंजान है
बेपर्दा से जज़्बात लिए चलो ये शाम उनके नाम करते हैं

थक गई है बहन हाल हमसे पूंछ पूंछ कर
पुरानी शैतानियां याद कर चलो उसे फिर परेशान करते हैं

खूब छुपा लिया चेहरा थका हुआ बाप से
उनके साथ भी चलो मुकम्मल एक जाम करते हैं

टूटता सा बदन फिर भी मां की आंखों से चोरी
दर्द सारे बयान चलो उनसे भी आज सरेआम करते हैं

आज मुश्किल ही सही चलो एक काम करते हैं
बीत गए हैं अर्से कई चलो आराम करते हैं

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:heart::heart:

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Well penned

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@Shagufta shukriya

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@unknown_soul :black_heart:

@Wordsbyritti thanks you very much

Superb!