न जाने क्यूँ

जब से रूबरू हुए हैं तुमसे
जीवन का खालीपन कुछ दूर हुआ है…!
बिखरे हुए सपने को,
जैसे कोई नूर मिला है…!!
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दिल ने खोले हैं तुम्हारे लिए दरवाजे जबसे
खुदा से मिलना दो से चार हुआ है…!
हम तुम्हारे क़ाबिल नहीं,
फिर न जाने क्यूँ तुमसे इक़रार हुआ है…!!
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Kittu_ki_diary

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