राधा के कन्हैया

क्या तृष्णा में कान्हा भी अपनी राधा के प्रति होगा??
कैसे फिर वह स्वयं ही निर्मित अपनी अनुपम कृति होगा?
तथ्य गलत गर जगत में फैला जग भी फिर इक विकृति में होगा,
परे जगत के किसी द्वारका में कान्हा राधापति होगा।।

प्रेम जगत में निर्बंधन भी और अगर यह पूर्ण भी है,
रिक्ति क्यूँ खोजे मानव दूजा यार भी तेरा अपूर्ण ही है?
कान्हा बसता इसी प्रकृति में प्रकृति निरंतर घूर्ण सी है,
क्यूँ खोजे तू रिक्त पूर्णता प्रेम कुछ नहीं चूर्ण ही है।।।

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Bahut gazab ki rachna hai dost @1112
And
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