बदनाम शायर

लंबे अरसे बाद आज उनसे बात हुई
मुद्दतों बाद आज मुकम्मल एक रात हुई

जाने कहा ख़फा बैठा था मै खुद से
आज दोबारा मेरी मुझसे मुलाकात हुई

मशहूर ना सही याद हूं ये जान गया
तौफ़ीक दे दी ये तो बड़ी कोई सौगात हुई

मसला नहीं था दुनिया के पलट जाने का भी
मायनों की फेर-बदल ये कैसी मेरे साथ हुई

जीती हुई घड़ियां सरी धुंधला सी गईं
हार कर भी खुश हूं कैसी अजब मात हुई

कभी संगीन तो कभी मस्तमौला बनता था
आज फिर एक बदनाम शायर की बात हुई।

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waah, lit

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Thank you very much @7skywrites

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