मुस्कुराया, और आगे बढ़ गया।

मैं भीड़ के साथ आगे बढ़ा जा रहा था, और तभी सामने से हुस्न का कारवां आया। कारवें में और कोई नहीं बस, उसकी दिलकश नज़र और उसमे डूबा हुआ उसके इश्क़ का जज़ीरा था।

मैंने भी नज़रें मिलने का गुनाह आखिर कर ही दिया,
और पुरानी सारी बातें भूल इश्क़ का प्याला प्याली में भर ही लिया।

प्याला पीने ही जा रहा था मैं, की तभी मुझे मेरे डूब चुके इश्क़ की याद आयी। शायद ज़रूरत नहीं थी इसकी, फिर भी अपनी नज़रों से उसकी नज़रों को मैंने अपनी कहानी बताई।

उसने मुस्कुरा कर देखा एक दफा इस कदर , मानो मेरी सारी कहानी जान चुकी है वो। उसे मेरे बीते कल की परवाह नहीं, आने वाले कल का सपना अपनी नज़रों में लिए मुझे अपना मान चुकी है वो।

शायद मेरे इश्क़ का प्याला होंठों से लगा चुकी थी,
पर घूंट अंदर लेने से पहले मेरे इज़हार को रुकी थी।

उसकी खुशी का अंदाज़ा लगा कर, मैंने भी प्याली को होंठों से लगा लिया। और मुझे यूं लगा कि मैंने बीते लम्हों से पीछा छुड़ा लिया।

अभी तक तो वो कारवां मेरे सामने से गुज़र रहा था,
और मेरी ओर नज़रों से वार पे वार कर रहा था।

मुझे लगा कि मेरी तलाश शायद आज पूरी हुई, और मेरी ज़िन्दगी भी अधूरी नहीं। लेकिन वो मेरे इश्क़ में पड़ ही गई हो, ये भी तो ज़रूरी नहीं।

मैंने ये सोच अपना कदम पीछे खींचा, और उसके इज़हार का इंतजार करने लगा। पर वो तो शायद अभी भी होंठों से प्याला लगाए खड़ी थी, कहीं मै गलत तो नहीं सोच आज एक बार फिर मै डरने लगा।

कितना कुछ चल रहा था हमारे बीच,इस बात का किसी को तकाज़ा ही नहीं। आखिर मै भी समझ गया, की उसे तो मेरी फिक्र का अंदाज़ा भी नहीं।

ये सब सोच ही रहा था, कि सामने से वो कारवां गुज़र गया। इश्क़ की तो कोई बात ही नहीं, पर उन नज़रों से किए वार का मतलब मैं सोचता ही रह गया।

शायद हम ना बने थे मिलने को, तभी तो उस हुस्न के करवें को मेरे सामने से था यूहीं गुजरना। मै ही बेवकूफ था बड़ा, और गलती थी मेरी उसकी बेफिक्री को इश्क़ का इशारा समझना।

उसका मेरे सामने से गुज़रने का वाकया, तो मेरे अंदर एहसासों का समंदर भर गया।
मै एक पल को रुका,
मुस्कुराया, और आगे बढ़ गया।

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@Shagufta Bohot bohot shukriya aapka, this support encourages a lot

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@Shagufta agreed mam, totally :v::slightly_smiling_face::slightly_smiling_face:

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