नाज़ायज़ औलाद

shayari
poem
serious
sad
#1

वो आया था इस दुनियाँ में अनचाही चाहत के मारे
सबने चाहा था उसको मिटाना आने ना पाए दुनिया में,
अस्तित्व मिटाना चाहा सबने उस भ्रूण में पल रहे जान की
पर किस्मत में कुछ और लिखा वो नाज़ायज़ औलाद था ।

इक भूल हुई थी उसके जनक से उस भूल का वो परिणाम था
वो फिर भी आया दुनियाँ बस उसका यही आगाज़ था,
बस पैदा होना था उसका हड़कंप मचा था चारो ओर
हर लफ्ज़ खुले हर लब बोला वो नाज़ायज़ औलाद था ।

खुश हुई थी उसकी माँ फिर भी उसके ही खून का कतरा था
वो रोई थी चिल्लाई थी सीने से लगाकर बिलखी थी,
बस बहुत हुआ फिर वक़्त फिरा ममता से परे अब होना था,
फिर उस से जुदा अब होना था दुनियाँ वालो का कहना था
वो नाज़ायज़ औलाद था ।

वो पुष्प खिला जो नया नया जननी से जुदा अब होना था
वो बिलख रहा तन खुला हुआ कर दिया पृथक उसकी माँ से,
था खतरे में उसका भविष्य ना उसका अब कोई ठिकाना था
ले गए उसे यु फ़ेंक दिया वो नाज़ायज़ औलाद था ।

वो पड़ा रहा कचरे के ढेर में घंटो तक फिर वो रोया था
फिर नज़र पड़ी उस कुत्ते की आवारा था और भूखा था,
वो पहुंच गया उसके समीप बस खाने की अब देरी थी
क्या किस्मत लेकर आया था वो नाज़ायज़ औलाद था ।

आवारा था और भूखा था पर दिल बड़ा इंसान से उसका था
दांतो में दबोचा बिन घाव दिए इतना ख्याल बस उसको था,
महफ़ूज़ जगह रखा उसको फिर साफ़ किया अपने जुबान से
ये देख के उमड़ी भीड़ वहाँ पर दिल ने किसी का पसीजा था
बस देख रहे सब यह लीला वो नाज़ायज़ औलाद था ।

उस भीड़ से निकला एक शख्श तभी दरियादिल उसके पास था
आँखों में आंसू थे उसके लगा इंसानियत का जागा एहसास था,
हाथो में उठा वो ले गया अपने घर जो थोड़ा ही पास था
शायद परिवार मिले उसको जो अब तक नाज़ायज़ औलाद था ।

ले गया उसे पत्नी समीप जिसके कोंख का आँगन सूना था
गूँज उठी किलकारी उस घर में जो सालों से अब तक तरसा था,
अपनों ने ठुकराया जिसको गैरो ने उसे अपनाया था
शायद ऐसी ही किस्मत वाला वो नाज़ायज़ औलाद था ।

अब कुछ सवाल आप सभी से ??

क्या गलती थी उस बालक की जो ना अपनी मर्ज़ी से आया था
मर्ज़ी शामिल थी उसके जनक की जो इस दुनियाँ में आया था,
कमज़र्फ मतलबी दुनियाँ में जो मतलब की बस भूखी है
क्या जुर्म किया उस बालक ने जो नाज़ायज़ कहलाया था ।:cry::sob:

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#2

Bohot khoob likha hai… Your ending was too good… :clap:

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#3

bahut bahut dhanyawad sir…
:slightly_smiling_face::slightly_smiling_face:

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#4

This is so beautiful.

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#5

@poetry_unvoiced Hatts off man
Kya Khoob likha hai mere dost,

pehle to maine socha bahut lamba hai, par fir padhte padhte kab khatam ho gya pata hi nhi chala. or tumhara topic bahut accha, khaas or sayad zaruri bhi tha.
ek nanhi si jaan ka kya kasoor agar kisi ki galti ki saza use mile.

keep writing brother and yes
Welcome to YoAlfaaz family

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#6

thanx alot sir :innocent::innocent:

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