शायरी मेरी जिंदगी की

1.आँखों के इशारों को ,अल्फाज़ो की क्या जरूरत…?
मोहोब्बत की इनायत को,सलाखों की क्या जरुरत…?
होती है जिन्हें, फस जाते हैं ख़ुद ब ख़ुद इस दलदल में…
इश्क़ के काफ़िरों को, साज़िशों की क्या जरूरत…?

2.न वादा किया है ताउम्र साँथ निभाने का
न झूठी उम्मीदें जगाई हर पल पास रहने की
फिर भी,उसने मोहब्बत मेरी रुह से कि है
क्या जरूरत है अभी भी,शायरी में माँ कहने की

  1. हर उस रात को इंतजार है इक सवेरे का…
    जिस रात की चादर में चाँदनी महरूम है…
    ये जानकर भी,कि मिट जायेगा, उजाले के आने से…
    उस अंधेरे को,न जाने क्यूँ…? मर-मिटने का जुनून है…

  2. कुछ लम्हे, जिंदगी भर की विरासत बन जाते हैं…
    आँखों से उतरकर, ये दिल में बस जाते हैं…
    मुक्कमल वक़्त की ताक में बैठकर…
    इक अरसे की खुशियों को बेशुमार कर जाते हैं…
    कुछ लम्हें, यूँ ही, रोज की आदत बन जाते हैं…

  3. मौत में सुकून हो न हो …
    ऐ दोस्त… कफन में तिरंगा जरूर होना चाहिए…

  4. है जिन्हें शिकवा आज, मेरे मस्जिद चले जाने से…
    कल कशिश भी उन्हें ही थी,उसके मंदिर चले आने से…

  5. यक़ीनन, ये दिखावे की रस्में भूल जाते हैं…
    अक़्सर, मेरे अल्फाज लोगों के दिल मे चुभ जाते हैं…

3 Likes

Bohot khub likha he, Dil chhu liya apki Kalam ne @Shivam_Mishra💐

1 Like

Tqsm💓

1 Like

Pleasure to read such a beautiful work💐

1 Like