मुकम्मल रात

निगाहों से अंजान हो जिसपे तोहमत धरते हो
जिया नही है अब तलक और तिल - तिल मरते हो
ढंग से गुज़ारी नहीं शाम तुमने ढलते सूरज के तले
इस चांदनी रात को मुकम्मल करने की बात करते हो

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:heart::heart:

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Shukriya :black_heart: :pray:

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