निगाहों की क़ैद

नाकामियां नहीं जिसका काम करना ज़ैद था
कुछ सुर्ख आंखों तले अब जो वो कै़द था
अमूमन सेहमा लगे ताकता किसी को हर घड़ी
जो आज है मुंतज़िर वो भी कभी जुनैद था

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