क्यों करते परियावरण से मज़ाक।

ये कैसा भविष्य,
भरा है जिसमें दुषित परियावरण,
बस जो भी आए,
भाषण देकर चला जाए,
अपने अपने मतलव साध जाए,
किंतु इनको कौन समझाए,
अब जनता सच में परियावरण के लिए चिंतित,
भाषणों, डिवेटों और प्रर्दशनों से नहीं होने वाला कुछ,
क्योंकि परियावरण पहूंच चुका है आईसीयू
अगर अब भी नहीं करोगे इलाज,
तो सब डुब मरोगे इस बार।
हैरानी है न्यायलय पे,
वो भी परियावरण का नहीं सोचते,
अपने फैसले एक दुसरे पे छोड़ते,
उनको भी लगता है डर,
कहीं राजनितिक अजगर न ले डस।
खैर हमारा तो छोड़ो,
हमने‌ तो काफी जी लिया,
परंतु अगली पीढ़ी ने क्या कसूर किया,
क्यों नहीं सब लोग एक साथ इकठ्ठा हो जाते,
और सख्त फैंसला ले लेते,
विकास की आड़ में न करेंगे परियावरण से खिलवाड़,
न्यायलय पे न छोड़ेंगे हर बात,
तभी प्रथ्वी रहेगी भविष्य के लिए जीवंत।

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