नाफिक्र बचपन

वो बचपन,
मेरा चड्डी में घुमना,
तितलियों को पकड़ना,
चींटीयों को मारना,
मीटी को खाना,
और फिर मां का ड़ाटना,
प्यार करना,
अपनी गोद में बिठाना,
मेरा उसके बाल नोचना,
उसका गुस्सा दिखाना,
मेरा खिलखिला कर हंसदेना,
वहां से भाग जाना।
मां का मुझे खिलाना,
मेरा खुद खाने पे जोर देना,
उसका मुझे छोड़कर बाकी कामों में लग जाना,
मेरा खाने को सारे मुंह पे लपेट लेना,
उसका मेरे मुंह को साफ करना,
ये सब कहां खो गया।
मेरा दोस्तों से खेलना,
बहुत से कंचे इकठ्ठे करना,
कापी पे उल्टी सीधी लाईनें मारना,
बड़े भाइयों को नहीं पढ़ने देना,
उनकी किताबें फाड़ना,
किश्ती का बनाना,
पानी के टब में उसको तैराना,
कहां खो गया।
मेरा प्लास्टिक के बैट और बाल से क्रिकेट खेलना,
किसी और को बारी न देना,
अपनी मर्जी से आउट मानना,
जब चाहे बालिंग करना,
दुसरे को न आउट होने पे भी आउट मानना,
कहां खो गया।

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शुक्रिया किरण जी।