क्या लिखूं मै

क्या लिखूँ मैं जो तुझे अपना सा लगे…
पढ़ना तेरा हक़ीक़त ना हो, और सपना भी ना लगे…

लिखूँ कुछ ऐसा की कोई वजह ना मिले…
कलम शर्मिंदा ना हो, और तुझे भी बुरा ना लगे…

मन्नतोंमें रही कमिको मिन्नतोंसे पूरी कर दूँ…
वो बुरा भी ना समझा जाये, और ख़ुदा भी ना लगे…

रूठना कभी मुझसे तो ये तरकीब आज़माना…
तू पास चाहे ना हो मेरे, पर जुदा भी ना लगे…

आईना हमारी चाहतका गिरके बिखरने जो लगे कभी…
उठाना कुछ ऐसे की जुड़ भी जाये और टूटा भी ना लगे…!!

“J”

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Shukriya… !!

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Very nice post @jay_dubey
And
Welcome to YoAlfaaz family
Keep writing and sharing :slightly_smiling_face:

Pyaara likha hai
Keep it up… :revolving_hearts::revolving_hearts::heart_eyes:

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Thank you

Thanks

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