क्या मै ये मान लूं?

क्या मै ये मान लूं ?
तुम भूल गई हो मुझे।
जो वादे किए थे
हजारों सपने सजाए थे
क्या मानलू वो सब
बस ख्वाबों में जीने थे?

क्या मानलू मै
के उस चेहरे की मुस्कान
मैंने आंखें बार ना देखी थी?
फिर ज़िन्दगी की इस राह पर
क्या तुम लौट ना आओगी?

क्या मानलू मै बस
तुमको याद करके जीना है?
ख्वाब सजाने है?
तुम न आओगी इन ओंथों पर मुस्कुराहट लौटने,
ये
सच में मानलू?

क्या मानलू ए खुदा
के सपने बास टूटने दिखाए जाते है?
ऊन पारियों की कहानी
वाली को परी मेरे जिंदगी में
आयु थी
क्या उससे वो आंखरी मुलाकात थी?

जो अच्छाई की राह चुनी है
क्या इस तरह छूट जाएगी?
ना अच्छाई रास होगी
बुराई लिबास होगी
यूं जीने के इस चाहत की
ऐसे फर्ज अदई होगी?

क्या सचमे मानलू मै?
के अंधेरे में जीना है?
यूं बेइंतहां चाहता कि
कोई रूबाई नहीं होती?
क्या दिल लगाने वालों पे
दिल लगाई नहीं होती?

-jeet

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