जीवन का सफर।

जीवन का सफर,
ये खत्म न होने वाली डगर,
जितना चलो,
उतनी बढ़ती जाती,
कभी कठिनाई,
कभी आसानी,
बस यही जिंदगानी।
नये नये अनुभव,
नये नये मुकाम,
कभी न थकने वाले ये काम,
हर अनुभव एक शिक्षा,
बस फिर अगले अनुभव की प्रतीक्षा,
न स्कुल न कालेज जाने की आवश्यकता,
न डिग्री न डिप्लोमा,
वलां अनुभव से वड़ा कौन होता।
ये जो अनुभव से ही सीख पाते,
यही सच‌ में जिंदगी के काम आते,
और जब तक सांस जिंदगी का सफर आगे बढ़ता।

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