वो कौन थी।

जब घर से निकला,
जैसे ही सड़क पे पहुंचा,
अपनी ही धून में बढ़ा जा रहा था,
अपने आप से बातें किए जा रहा था।
तभी एक हारन‌ बजा,
मैं उसकी तरफ मुड़ा,
सामने एक हसीना,
चेहरे को दपटे से लपेटा,
घूरे जा रही थी,
सिंहनी की तरहां एक टक देखें जा रही थी,
जैसे आज बस नहीं छोड़ेगी,
सारा का सारा गुस्सा मुझपे थोपेगी,
मैंने तुरंत अपने आप को संभाला,
धीरे से रास्ते से हटा,
और सौरी बोला।
उसने असहमती से गर्दन को झटका,
और एक्सेलीटर पे पांव रखा,
तुरंत आंखों से हुई ओझल।
मुझे अपनी बेबकुफी पे काफी गुस्सा आया,
मन ही मन बहुत पछताया,
और अपने घर को लौट आया।

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Ek ankahi kahani jo aksar ho jaya karti he
Hum jinhe lafz nahi de pate
Use bakhubi piroya he apne.

It’s beautiful. Keep sharing.

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