मुन्तज़िर

हर रोज़ ख़ामियाज़ा भरता हूं
मुन्तज़िर हूं रोज़ मरता हूं
शायद परेशानी ही यही है
हूं नहीं जो होने की कोशिश करता हूं

7 Likes

Bohot khub :+1:t2:

1 Like

waahh!!:clap::clap:

1 Like

वाह क्या बात है❤

1 Like

Shukriya sahab

Jandar​:ok_hand::ok_hand:

1 Like

:pray:

1 Like

बहुत बहुत शुक्रिया आपका🖤

Dhnyavad sahab