हाथों में नमक है

बेवफ़ाइयो के दौर में तू मोह्हबत की ख्वाइश न कर
टूट जाएगा काँच की तरह,जोर आजमाइश न कर

तेरी कोई न सुनेगा ,तू वक़्त बेवक्त फरमाइश न कर
हाथों में नमक है यहां सबके,तू यूँ जख्मो की नुमाइश न कर।।
©मानवेन्द्र सिंह

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