इंतज़ार ही इंतजार।

जब से होश‌ संभाला,
उसके इंतजार में ‌‌‌‌समय निकाला,
हर दिन हर पल,
वही रहती दिमाग में,
नींद भी नहीं आने‌ देती चैन से।
जरा‌ सी आहट,
झट नज़र दौड़ती इधर उधर,
शायद अब तो आ जाए,
किंतु वलां इंतजार से कौन हार पाए।
परंतु हमने भी ठानी‌ है,
कहां ‌‌‌हार मानी‌ है,
लगे हैं गड़ने नये नये मनसूबे,
शायद इसी बहाने वो आ टपके।
शायद ही कोई इतना निष्ठुर होगा,
जो अपने में इतना सलंग्न होगा,
तुम लिखे जा रहे हो,
और वो नसमझ बने हैं।
हमारा तो भगवान ‌‌‌‌ही गवाह,
कि हम वक्त कैसे बिता रहें हैं,
शायद उसको फर्क नहीं पड़ता,
इसलिए जबाव देने की जहमत नहीं उठा रहे हैं।

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Bohot khoob

Welcome to YoAlfaaz dear,
Keep writing and sharing. :heart:

Awesome start with such a nice post @Anil_Jaswal
and
Welcome to YoAlfaaz family
Keep writing and sharing :slightly_smiling_face:

Thanks Ravi for encouraging words.

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