चाय और उनकी यादें

तेरी यादों को आज शाम बुलाया मैंने
चाय उनको भी मेरे साथ पिलाया मैंने

जैसे तुझको मैं परेशान किया करता था
बातों बातों में खूब उनको भी सताया मैंने

देर का कर के बहाना,उठ के जाने लगीं
फंसा के बातों में फिर उनको बिठाया मैंने

रूठ गयी वो भी तुम्हारी तरह मुझसे
हाथ जोड़कर उनको भी मनाया मैंने

क्या करूँ तुम्हारी यादे ही तो बची है
आज फिर उनसे ही काम चलाया मैंने
@मानवेन्द्र सिंह

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thank you so much

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Bohot khub. :heart:
Welcome to YoAlfaaz. :heart:

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धन्यवाद आपका

Very nice interesting start @Manvendra_Singh
and
Welcome to YoAlfaaz family
Keep writing and sharing :slightly_smiling_face:

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Thanks a lot👍

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