मौत को सद्दा

मौत को दिया सद्दा सब ने
लेकिन वोह किसी की मोहताज नहीं
कुछ पल जो बैठा मै उसके साथ
तो उसने मेरी बात सुनी
सुनते हुए वोह कुछ यूँ बोली
जो सुनने को मैं तैयार नहीं
मौत तो सबको आणि है एक दिन
करो सभी को प्यार याहीं
होते हैं लोग रोहबरहु मौत से
लेकिन सब बताने से कतराते हैं
बता दिया तो डर न जाये हम
वोह सब कुछ इस लिए छुपाते हैं
कुछ बोल न बैठे उस बात पे
इस लिए वह घबराते हैं
वोह जो डरते नहीं थे मौत से वह भी आज कतराते हैं
वोह जो डरते नहीं थे मौत से वह भी आज कतराते हैं
ख़ुशी के मौके पे भी खुद को ग़मज़दा वोह पाते हैं
ूँ तो वक़्त बिताते है पर मौत से ही घबराते हैं
उसके पास होने से मेरे मन में भी एक सवाल आया है
सवाल कुछ ऐसा था मेरा जिसने मौत को भी घबराया है
उलझन में जब वोह पौहंची उसने मुझे बतलाया है
सुनते ही मैंने उसको अपने घर का पता बताया है
घर पे आते ही उसने कुछ ऐसा खेल रचाया है
अकेला खड़ा था जो व्यक्ति
उसको कंधो पे लाया है
उसको कंधो पे लाया है
- RIKSHIT DEVGAN

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Great start friend @Writers_world_r
And
Welcome to YoAlfaaz family
Keep writing and sharing :slightly_smiling_face:

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Welcome to YoAlfaaz dear. :heart:
That’s so Nice. :heart:

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