" प्रलय "

poem

#1

इंसान ही इंसान की नस्ल को मिटाएगा ,
देख लेना इसी प्रकार धरती पर प्रलय आएगा।
यह हिंसक पुतले ,जब मार - काट खाएंगे एक दूसरे को,
तब खून का रिश्ता भी पानी हो जाएगा ।
जब प्रेम का सूर्य अस्त होगा ,
बस आतंक और भय का परचम लहराएगा ।
तब यह जो वैभव से भर पूर जहान है ,
एक दम से नस्त ओ नाबूद हो जाएगा ।
इन नफ़रत के अंधेरों से जुदा होकर ,
इश्क़ मौत की नींद में सो जाएगा ।
तब सुदर्शन चक्र भी थम जायेगा ,
और अश्राफ़ील फ़रिश्ता भी तूर बजाएगा ।
एक पल मे जो हुआ था शुरू ,
वह कुन फया कुन पर मिट जाएगा ।
जो दिवस था आयुष नाम का ,
वह क़यामत की रात मे बदल जाएगा ।
ऊपर बैठा बूढ़ा विधाता भी ,
अपनी करतूत पर पछताएगा ।
अगर करेगा फिरसे ब्रह्माण्ड की रचना ,
तो उसमें इंसानों को नहीं बनाएगा ।
इंसान ही इंसान की नस्ल को मिटाएगा ,
देख लेना इसी प्रकार धरती पर प्रलय आएगा।

  • शाहीर रफ़ी

Glossary :

सुदर्शन चक्र - the wheel signifying time here ,but it is otherwise associated with Lord Sri Krishna as Vishnu’s incarnation .

अश्राफ़ील - An Angel in Islamic theology meant for regulating the cosmic balance . Holding a trumpet (तूर),which when blown signifies the advent of the Day of Judgement (क़यामत) .

कुन फया कुन - a proclamation by the Almighty which gives the narration of the creation of the universe within a second and the same will collapse by the utterance of these words .


#2

Pralay
kya khoob darshaya hai tumne ye chitr
kya khoob dikhlaya iska pridaam

maza aa gya