ख्यालों की आज़ादी (व्यंगात्मक कविता)

poem

#1

आज़ाद ज़मीन हो गया तो क्या ,
दिल अभी भी ग़ुलामी का शिकार है ।
आज़ाद सोच की जगह नहीं है यहाँ ,
यह कैसा अनोखा कारागार है ।

पक्षपात की हवा चलती है यहाँ ,
यह तो सियासत का बाज़ार है ।
गुनाहगार छूट जाता है यहाँ ,
बेगुनाह फिर भी सज़ावार है ।

भगवन ख़ुदा भी बिक जाते हैं यहाँ,
उनकी हालत भी बेकार है ।
लाख रौशनी को तलाश करो ,
फिर भी घना अंधकार है ।

आडंबर के अंधे है यहाँ ,
विवेक इनकी बेबस - ओ - लाचार है ।
तभी तो इनके मेहनत के पैसों से भरा,
धर्म अनुष्ठानों का कोशागार है ।

यूँ ही नहीं हुई यह धरोहर कलंकित ,
यूँ ही नहीं फैला भ्रस्टाचार है ।
कितने ही पुराने फाईलों मे पड़ा बंद,
आम आवाम का अधिकार है ।

न जाने कहाँ है "वसुधैव कुटुम्ब " की भावना,
जाने कहाँ छुपा परूपकार है ।
आज़ाद दुनिया मे सरहदें न थी ,
आज मतलबी दीवार है ।
कहाँ तक सीमा है तुम्हारी ,
कहाँ तक तुम्हारा विसतार है ।
किसी देश का वासी नहीं हूँ मै,
मेरा घर तो पूरा संसार है ।

स्वाधीन तुम्हारा जिस्म हुवा है ,
पराधीन तुम्हारी इन्द्रियां है ।
खुदके ख़याल भी आज़ाद नहीं ,
हाथों मे समाज की बेड़ियां है ।
कहो ऐ आज़ादी के चाहनेवालो ,
यह कैसा अजीब विचार है ।
आदमी की आदमीयत से बढ़कर ,
यह बनावटी संस्कार हैं ।

सत्तर साल की आज़ादी के बाद भी ,
क्या कुछ भी सुधार है ।
वही बैर फूट ,वही हाहाकार है ।
वही दंगे है, वही तकरार है,
बस नये चेहरे है नए किरदार है ।

मंथरा की ज़रूरत नहीं है अब,
उसके लिए मिडिया और अख़बार है ।
आजकल हर जगह अफवाएं मिलती है,
क्योंकि बिक गए कुछ पत्रकार हैं ।

समय से कदम ताल मिलाने के लिए,
अब तो फाटक मै भी काफी रफ़्तार है ।
विज्ञान बहुत आगे बढ़ चुका है ,
अकेला तनहा कोई कलाकार है ।

ज्ञान की बात निकली तो खयाल यह आया,
राजनीती के तक्त पर बैठे हमने किसे पाया ।
बुद्धिजीवी अटेंड करते बस सेमिनार है ,
और देश चलाते जाहिल गवार है ।

जब होगी हर किसीकी सोच आज़ाद ,
न रहेगा मत भेद ,न रहेगा जातिवाद ।
न होंगे दिल पे ताले लगाने वाले ,
न होंगे हमे समझने वाले ।
न होंगी धर्म की बेड़ियाँ ,
बस खुला जहाँ होगा ।
न रहेंगी कोई सीमाएं ,
बस छत्र बन खुला अस्मा होगा ।
अभी तोह बस यह एक विचार है ,
जब खयाल ही आज़ाद नहीं ,
तो कहाँ आज़ादी के आसार है ।

                        - शाहीर रफ़ी

#2

Ab ye hai kuch dhamakedaar post, last ke antre ne to kamaal hi kar diya bhai
@Shaheer_Rafi , I’m happy to see you here and happy to read you as well.