इश्क़, अश्क़ और लफ्ज़

मेरी गज़लों के अल्फाज़ तो फीके हैं
मिठास इनमें तेरे इश्क़ की है
कलम मेरी ज़रा ज़ज्बाती है
कागज़ पर वो स्याही मेरे अश्क की है
मैं लिखता जाता हूं तुझको
तू बाकी रहती जाती है मुझमें
तू ना सिमटती सी कहानी मेरे लफ्ज़ की है…

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Beautiful. :heart:

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क्या बात हैं… :metal:

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Behad khoob.

bohot khoob!!:+1: