मोहब्बत?

इश्क़ ने अब सीरत देखना छोड़ दिया
इश्क़ ख़ुदग़र्ज़, मतलबी सा हो गया है
मोहब्बत ने अब शर्माना छोड़ दिया
जिस्म मोहब्बत का पर्दा सा हो गया है
शर्तों पर चलती है वफ़ा की सांसें
दिल दराजों में रखा खिलौना सा हो गया है

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बहुत प्यारा।।

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:heart::heart:

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