तुम मुझ सी हो... 👫

तुम उर्दु सी उलझी हो ,
मै हिन्दी सा सुलझा हूँ!
लोग कहते हैं तुम मुझ सी हो,
मै तुझ सा हूँ!
तुम गज़ल सी खूबसुरत ,
मै बच्चो के लेख सा बद्सुरत हूँ !

तुम कुदरत सी घनी ,
मै पतझड़ सा एकान्त हूँ!
तुम झरने सी चंचल,
मै ठहरे हुये तालाब सा शान्त हूँ !

तुम सर्दियो की धूप सी ,
मै गर्मियों के आसमान सा हूँ!
तुम बनारस की गली सी,
मै दिल्ली के तापमान सा हूँ!
लोग कहते हैं तुम मुझ सी हो,
मै तुझ सा हूँ! :heartbeat:

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Haaye…
बहुत ही प्यारा हैं।
I just loved it. :kissing_heart::kissing_heart::heart_eyes:

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बहुत बहुत शुक्रिया रितिका :heartbeat:

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