जिंदगी बताऊ तुझे

कभी मिल तू अकेले,
कस के पकड़ू तुझे,
अपना हक़ जताऊं तुझे,
रोज के नख़रे बताऊ तुझे,
तूने जो रुलाया मुझे,
जिंदगी आ एक बार रो कर बताऊ तुझे।

यह शोर सराबा,
आंसुओ का मुर्र्बा चखाऊ तुझे,
मेरे ग़म, मेरी तन्हाई से मिलाऊँ तुझे,
दूं दर्द तू न सहेगी,
गुट गुट के मरेगी,
फिर दर्द देने से डरेगी,
क्या सबके सामने बताऊ तुझे,
अकेले में मिल फिर बताऊ तुझे।

क्या बताऊ,
दुख में कोई साथ नहीं देता,
ख़ुशी में कोई दूर नहीं रहता,
गलत काम हो तो हंसते है,
सही काम हो तो मुँह फेरते है,
लोग ग़मो के जंजाल में फंसाते है,
फिर हक़ अपना जताते है,
अब क्या मेरा कहना,
क्या तेरा सुनना,
तू तो सब जानती है क्या बताऊ तुझे,
फिर भी, मिल तो अकेले बताऊ तुझे।!

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Great work. :heart:
Keep writing. :heart:

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nice piece of writing :+1::slight_smile:

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Thanks

बहुत ही उम्दा।
बेहद गहरी कहानी है इन पंक्तियों में।।

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धन्यवाद

Hello @Ram.k.choudhary welcome to YoAlfaaz. :slight_smile:
In YoAlfaaz, members are free to share their writings and even upload images. But, the images should be without watermark.
Your uploaded image contains a watermark and thus it’ll be removed in a few hours. And you are most welcome to create a new post but without a watermark. :slight_smile:

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I removed watermark image. Ok.

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