कुछ लिखा नहीं जाता, कुछ सोचा नहीं जाता!

कुछ लिखने बैठती तो
लिखा नहीं जाता
अगर कुछ सोचूँ तो
सोचा नहीं जाता
प्यार करना सिखा
नहीं सकती मैं
नफ़रत के क़ाबिल है कोई
ये बता नहीं सकती मैं
हँसते कैसे हैं ये
भी भूल गई मैं
रोने का तो सवाल नहीं
इस दुनिया में छिप-सी गई हूँ
बदलते लोगों को देख
मैं भी बदल-सी गई हूँ
सबके जाने से फ़र्क़ पड़ता
मगर जताना छोड़ दिया हैं
रात दूसरों के साथ नहीं
ख़ुद के सपनो के नाम कर दिया है
सवाल आते कितने हैं
मगर जवाब में बस चुप्पी है
लोग कहते तू बदल गई है
उनके इस झूठ में भी हाँ भर दिया है
कुछ किया नहीं मैंने बस
जवाब देना बंद कर दिया है
लोग ग़लत समझे की सही
इस बात को भी नज़रअन्दाज़ करना सीख लिया है
मैं-से-मैं में रुक गई हूँ
अगर कोई अपना समझा तो
उससे भी दूरी बना लेती हूँ
“कुछ लिखा नहीं जाता कुछ सोचा नहीं जाता
दुनिया की बातों से अब ज़ख़्म भरा नहीं जाता।।।”
© Crooked_dimple
Aditi

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every line is beautiful and intense…

are wah
bahut khoob
Post ka title interesting or fir post gazab, khaas kar last ki lines