माँ तू अच्छी लगती हैं |

माँ तू अच्छी लगती हैं |

समझ जाया करती थी ईशारो मे तू,

आज पता नही क्यू तेरी बोली समझ नही लगती हैं…

बचपन में वो सारा घर सर पे उठा लेता था,

आज बिना डाँट के तेरी, ये चौखट सूनी लगती हैं…

लिपट जाया करता था यूही बात बात पे तूझसे,

आज जब सुबकता भी हू तो ये बाँहे खाली लगती हैं…

रख कर तेरी हथेली पर सिर ना जाने कब नींद आ जाती थी,

आजकल तकिए से लिपट कर भी सोता हू तो ये राते लंबी लगती हैं…

परदेश में आकर आज तेरी हर एक बात सच्ची लगती हैं,

माँ तेरी कच्ची रोटीया भी आज अच्छी लगती हैं…

“भूख नहीं हैं” कह कर अपने हिस्से का निवाला भी मेरे हिस्से रखने वाली ए माँ तू कितनी सच्ची लगती हैं…

माना कि नहीं हैं मुमकिन कुछ लिखना तूझपे,

पर ममता की श्याही कागज पर यू बिखरते अच्छी लगती हैं |

माँ तू अच्छी लगती हैं |

  • डॉ. नरेश बुरड़क
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Nice post… welcome to YoAlfaaz…:blush::pray:

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Great :heart:
Welcome to YoAlfaaz. :heart:

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BAHUT KHOOB RACHNA HAI AAPKI
Nice start brother
and
welcome to YoAlfaaz family @Drburdak
Keep writing and sharing :slightly_smiling_face:

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Welcome to yoalfaaz…
Well… lovely composition…
Keep sharing :heart_eyes::heart_eyes::heart_eyes:

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