वो! ! ! !!

कड़कती धूप मे सुनहरे चादर सी हैं,
अकाल मे बरसती बारिश सी हैं वो,
मायूस चेहरे पे खिलखिलाती हँसी हैं वो,
उस सर्द की मखमली धूप हैं वो,
ईद क़े चाँद का नूर हैं वो,
बेदाग, निश्छल, मासूम हैं वो,
आखों मे अंगार लिए हैं वो,
वो औऱ कोई नहीं तुम हीं हो वो! !

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