मोहब्बत से ऐतबार चला जायेगा

जिस दिन तेरी महफ़िल से ये खुद्दार चला जायेगा|
उसी दिन ये सारा रौनक-ए-मय्यार चला जायेगा l
तू बेशक कत्ल कर मेरा मगर चुपके से चला जा
वरना लोगों का मुहब्बत से ऐतबार चला जायेगा l
बस मेरी लाश के गिरने तलक तमाशा है,
फ़िर देखना कि कैसे ये बाज़ार चला जायेगा l
तू तो तेरी सहूलियत के मुताबिक ही इश्क करता है,
मेरी सहूलियत पे मुझको मार, ये गुबार चला जायेगा
थोड़ा सा वफाओं का ज़हर भी मिला दे इसमें,
वरना ये तीर तेरा यूं ही बेकार चला जायेगा l
एक लम्हा ही सही कभी मेरी तरह इश्क तो कर,
उम्रभर के लिये तेरा ये करार चला जायेगा l
खैर ! तेरी भी मजबूरी है जख्म देते रहना,
वरना तेरा मरहम का कारोबार चला जायेगा l
मेरी कश्ती को मेरे सीने में डुबा फ़िर देख “ऐ गुमनाम”,
तेरी मौजों से तेरे तूफां का सारा भार चला जायेगा ll

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Nice post…
Welcome to YoAlfaaz family…:slight_smile:

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प्रतिक्रिया के लिये बहुत बहुत आभार आपका

very awesome start and I enjoyed reading this
also
Welcome to YoAlfaaz family @Siddhartha_tiwari
keep writing and sharing :slightly_smiling_face:

Keep writing like this. :heart:
Welcome to YoAlfaaz. :heart:

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