मेरी ग़ज़ल

मेरी ग़ज़ल बैठी थी महफ़िल में,
उसने मुस्कुरा कर इरशाद किया।

मैं बाहर आया सुहानी मदहोशी मैं,
मेरी ग़ज़ल ने मुझको याद किया।

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