नारी!

समझो तो वो कितनी आसान है!
थोड़े उलझे से लफ़्ज़ों की वो सुलझी सी किताब है,
समझो तो वो कितनी आसान है,
हर लहज़े मैं ढ़लान नियति है उसकी, पानी जैसा जो सोहभ है ,
समझो तो वो कितनी आसान है,
वो सरगम का गीत भी वो गूँजती सी आवाज है,
समझो तो वो कितनी आसान है,
गिरना उठाना ओर सँभालना तो सब जनते है,
वो तो संभालने में भी उस्ताद है,
समझो तो वो कितनी आसान है,
थोड़ी गरम है थोड़ी नरम है , ये उसके हमपर कर्म है,
वो न हो तो कुछ नही वो है तो ये संसार है ,
समझो तो वो कितनी आसान है।
©AshuGupta

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nice work @Aashi_Gupta
bahut khoob likha hai tumne :slightly_smiling_face:

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Thank you

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Behad khoobsurat