हिम्मत!

ना रुकना न झुकना,
गिरना लेकिन गिर क़े संभलना,
अंदर कि आग कों जलाए रखना,
हवा का रुख मोड़ देना,
लेकिन पलट कर मत देखना,
आसमां कि चादर भले हीं फट जाए,
लेकिन हौसलों कि रस्सी टूटने न देना,
समय हीं तो हैँ जनाब कट जाएगा,
थोड़े दुःख हीं तो हैँ छट जाएंगे,
आँधी का डट क़े सामना करना,
भीड़ में भी अकेले होंने का गम मत करना,
तु बड़ा हैँ इन सब से,
परेशानियों कों बड़ा मत होंने देना,
बैशाखी छीन जाए तो अकेले चलना,
लेकिन सहारा किसी फ़कीर का कभी मत लेना,
तु बुलंद हैँ बेमिसाल हैँ,
हौसले तेरे हिमालय कि चोटियों से हैँ,
सबकी लाज रखते रखते ख़ुद कों न मिटा देना,
माँ-बाप कि फिक्र कर ज़िन्दगी से एक बार और लड़ जाना,
लेकिन इस बार ऐसे उठना कि,
गिरने से कभी मत डरना,
याद रखना तु कौन हैँ तेरा वजूदक्या हैँ,
तेरी मंज़िल और तमन्नाए क्या हैँ,
चल उठ अब और एक बाजी और खेल,
जीतना जरूरी नही पर लड़कर तु देख,
चल अब उठ तु…
चल अब उठ तु…

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Got goosebumps!! :heart::heart:

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:grinning::grinning::grinning::grinning:

after a long time I read something this good… :slight_smile:

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Thank you so much.

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bohot khoob!! :slight_smile::heart_eyes:

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Thank you :blush:

beautiful

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Thank you :heart:

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