एक सवाल

आज एक सवाल किया गया मुझसे,
क्यों उदास रहता हूं पूछा गया मुझसे।

उसके सवालो का जवाब दे ना सका मैं,
उससे अपनी उलझनो को कह ना सका मैं।

मैं कह ना सका कि बहुत टूटा हूं मै,
अब दिल ही क्या, खुद से खुद खाली हूं मैं।

हर ओर से थक हार चुका हूं,
जिन्दगी से मन मार चुका हूं।
अब किसी का इंतजार नही होता,
कैसे कहूं मोहब्बत का इजहार नही होता।

साथ एक जो हाथ से सफर में छूट गया,
किसी अपने कि तलाश में मैं कही टूट गया।
अब बस किसी कोने में सुकुं चाहका हूं मैं,
कौन कहता है हरदम उदास रहना चाहता हूं मैं।

आज एक सवाल किया गया मुझसे,
क्यों उदास रहता हूं पूछा गया मुझसे।
:writing_hand: अंशुल अग्रवाल

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