बेटे या बेटियां

बोये जाते है बेटे और उग आती है
बेटियां
खाद पानी बेटो में और लहलाती है
बेटियां
सुख के सपने दिखाते है बेटे
और जीवन का यथार्त बनती है
बेटियां
रुलाते है बेटे और रोती है
बेटियां
एवरेस्ट की ऊचांइयों तक टेले जाते है बेटे और चढ़ जाती है
बेटियां
किसी तरह गिराते है बेटे
और संभाल लेती है
बेटियां
अजी साहब जीवन तो बेटो का है और मारी जाती है बेटियां
अभिषेक चौधरी

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oh my god… beautiful enough dear…:ok_hand::ok_hand:

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It’s just amazing. Thank you for sharing this kind of write up. :heart:

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bohot bohot khub likha hai…loved it :heart_eyes::star_struck::blush:

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