सुनो ,वापस कब आरही हो?

सुनो ,वापस कब आरही हो?

सुनो ,वापस कब आरही हो ?
तुम्हारी यादो ने मुझे पागल सा करदिया है,
मेरे ही घर ने मुझे बेघर करदिया है।
शीशा देखु तो तुम नज़र आती हो,
कपड़े पहनता तो तुम्हारी आहटे सुनाई देती है,
चादर से तुम्हारी खुशबू जाती नही,
रसोई से तुम्हारी महक हर शाम घायल कर रही है।।

सुनो वापस कब आरही हो?
ज़माने से किनारा सा कर लिया है,
तुम दूर हो तो खुदसे ही जुदा हो गया हूँ,
साथ बिताया वो वक़्त, आज बेहद तड़पा रहा हैं।
कई मर्तबा दिल को समझाया, तुम नहीँ हिस्सा अब मेरे किस्सो का,
मगर दिल पर बस भी नही चलता आज कल।।

सुनो वापस मेरी तन्हाइयो को आबाद करदो,
तुमहारे साथ हर गली पर कूंच करना,
तुम्हारे करीब होकर धड़कनो को महसूस करना।
तुम्हारा साथ होना ,मानो मेरी नई संरचना हुई थी,
पहले से और तमीज वाला बनागयीं,
प्यार का असली मतलब बतलागयीं,
मेरी मोहबत को दीवानगी में तब्दील करगयीं।।

सुनो वापस मेरी गलियो में अपनी महक छोरदो,
मेरे हर अल्फ़ाज़ में तेरा ज़िक्र,
मेरे हर अहसास में तेरी फिक्र,
तुम्हारी चर्चा किये बिना ये दिल ढलता नही,
तुम्हारा नाम लिए बिना कहा ये चाँद नज़र आता है।
मेरे दिल को तो तुम सूना करगयीं,
मुझे आवारा बनागयीं,
फिर भी,
तुझे बया किये बिना ये कविता पूरी होती नही।।

सुनो वापस आजाओ,
माना मेने करी गलतिया दुनिया भर की,
पर इस दिल ने हक़ से तुम्हे चाहा है।
तुम्हारी आँखों से गिरे थे जो अहसास,
उनके लिये माफी कम है,
पर तुम्हारी मुस्कान देखने को तरस गया हूँ।
भूल गया था मैं, तुमने मुझे संवारा है,
मेने क़दर नही की, तो दुनिया ने भी साथ तुम्हारा हि दिया।

सुनो मत आना,
शायद में क़ाबिल नही तुम्हारी मोहबत के,
पर यकीन मानो, आज भी मेरी धड़कनो में जान है तुम्हारे लिये।
साँसे चल रही ही केवल तुम्हे याद करने के लिये,
जुबान चल रही है, सिर्फ तुम्हारा ज़िक्र करने के लिये,
मैं ज़िंदा हूँ, “तुम्हारे लिये”,
तुम चाहे जो कहो,
तुम्हारा अलावा किसी और को चाहने की खता हमसे ना होगी दुबारा।।

-wordsbyritti :two_hearts:

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loved it…:heart_eyes::heart_eyes::slight_smile:

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शुक्रिया :heart_eyes::heart_eyes::heart_eyes::black_heart::two_hearts::pray:

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Bahut khoob :sweat_smile::heart_eyes:

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Thankss :heart_eyes::two_hearts::heart_eyes: