वो बचपन

वो बचपन
-Alveera Hafeez

वो मासूम बचपन भी कितना खास था,
जब पिता की गोद मे हमारा तख्तो ताज था,
माँ का आंचल हमारा गुप्त स्थान था,
और डांट पड़ना भी एक सम्मान था।

दादी की लोरी, हमारे भजन थे,
दादा का प्यार, हमारे सजन थे,
नानी की दुलार, हमारा आशियाना थी,
नाना की जेब, हमारे खजाने की खान थी।

छोटे से होकर भी पूरी दुनिया अपनी थी,
जिस चीज़ पर हाथ रखो वो सब अपनी थी,
हर दिन एक नया आरंभ होता था,
खेल से दिन का प्रारंभ होता था।

वो बचपन भी कितना सुनहरा था,
जब सर पर माँ के हाथ का सहरा था,
जब किसी चीज़ का डर ना था,
जब डांट का कोई असर ना था!

ना जाने कब बचपन छूट गया हमसे,
ना जाने वो बचपन कब रूठ गया हमसे,
पर आज भी वो बचपन उतना ही खास है,
उसकी मीठी यादें आज भी हमारे पास है।


Ig- @unkahi.talks

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nice composition :slight_smile::+1::heart_eyes:

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Tysm :heart::heart::heart::heart::heart:

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