मुहब्बत है या आफत

ये जो रह रह के रिश्ता है आंखों से,जिसे अक्सर तुम मोहब्बत कहते हो,
कितनी ही उलझने मुश्किलें है इसमें,क्यों नही इसको तुम आफत कहते हो?

राहत के पल महज़ दो,
और परेशानियों का सबब हज़ार है,
टूट गए हो फिर भी सबसे बड़ी ताकत कहते हो,
मुहब्बत को मुहब्बत ही क्यों क्यों नही आफत कहते हो?

क्या नही है या क्या है जानता हूँ अच्छे से,
ख्वाहिशों को पनपते पनप के राख होते देखा है,
रिश्तों को जुड़ते फिर रिश्तों में सुराख होते देखा है,
तुम क्या बताओगे जन्नत या जहन्नुम हमको,
हमने मुहब्बत में अच्छे अच्छो को खाक होते देखा है,

नींद हराम है वो छोड़ के कुछ पल के मिलन को राहत कहते हो,
मुहब्बत को मुहब्बत ही क्यों क्यों नही तुम उसे आफत कहते हो?

ये जो रह रह के रिश्ता है आंखों से,जिसे अक्सर तुम मोहब्बत कहते हो,
कितनी ही उलझने मुश्किलें है इसमें क्यों नही इसको तुम आफत कहते हो?

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Welcome @Vinu on YoAlfaaz and your post is very good

is the part i like most

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are wah… beautifully composed… :clap:

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