चाँद का इंतजार

हर रात है रहता मुझे जिसका इंतजार
वो चांद! जो लगता कुछ-कुछ मेरे जैसा,
उससे मिलने को बेकरार
सैकड़ों तूफान लफ़्ज़ों में
दबा कर ज़र-ए-लब,
आंखों से गुफ्तगू करना
मैं बैठे निहारु उसको,
वो एक-टक देखें मुझको,
तारों के हुजूम में अकेला वो,
बशर-ए-दश्त में तन्हां यहां मैं।
उसके दीदार की खुशी में
मैं सिर्फ जागी नहीं,
उसकी चांदनी गवाह है
वो भी सोया नहीं।

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Welcome @Mayuri_Vats to Yoalfaaz and
Gazab ka post hai
Bahut khoob likha hai

beautiful poem :slight_smile: