ख़ुद को सवारना

हमेशा तुम्हारे ही ख्यालों में रहना,
उन ख्यालों की नदियों में बहना।
कुछ बीते लम्हों को याद करना,
तुमसे न कहते हुए भी, सब कुछ कह देना।
माह में दो बार तुमसे नाराज होना,
फिर खुद ही तरफदार बन, नाराजगी को दूर करना।
अब चाहत और प्रेम का क्या कहना…?
तुम्हारे ऐतबार में, ख़ुद को सवारना…!
Kittu_ki_diary

5 Likes

Bhut pyara… :heart_eyes::heart_eyes:

1 Like

@Wordsbyritti Thank you

lovely lines… :slight_smile:

1 Like

@thegurjyot thank you… :innocent:

1 Like