मन ही राजा, मन ही दास ।

इन्सान सारी ज़िन्दगी अप्ने शरीर की चिन्ता करता रेह्ता है,
कितना अग्यानि है, ये नहीं समझता कि जिस्कि चिन्ता पूरी ज़िन्दगी कर रहा हुं,
वह तो यहिं रह जायेगा, जिस्कि परवाह नहीं करता, वही साथ में आयेगा,
और वो है मन्न, मन का कोइ ध्यान नहीं रख्ता, सब उस्कि अव्हेल्ना कर्ते हैं,
लेकिन यह मन ही है जो आप्के साथ जायेगा, म्रुत्यु के पस्चात​, शरीर तो यहीं मिट्टी हो जायेगा ।
इसिलिये कह्ते हैं : मन ही राजा, मन ही दास, बाकी सब बकवास ।

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@Miss_Kamlani ji bikul theek kaha aapne

ye satya wo hai jo atal hai, ise koi jhutla ya badal nhi sakta
parantu insaan vastu ke moh me rehta hai
use man or pyaar nhi, vastu or deh ka moh hai

bahut khoob likha hai aapne :+1:

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Wow this

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Shukriya Raviji​:pray::blush:

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Thank you dear Twisha :slightly_smiling_face:

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Shat pratishat saatya @Miss_Kamlani grt lines written by u

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Thanks Nagmaji…:blush:

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