शब्दों का जादूगर...।

शब्दों से मोजज़े दिखाना ही मेरा काम है ,
क्या शायरों को कभी भी आराम है ।
अजी नींद और थकान भी मेरे लिए हराम है ,
बस लबों पर हरदम उर्दू का कलाम है ।

एक बरखुरदार ने पूछा ,
के बता शाहीरी नज़्म तेरा क्या दाम है ?
मैंने कहा मुझे मत ख़रीदो ,
मेरा नाम बाज़ार में बड़ा बदनाम है ।

माना ग़ालिब,मीर,खय्याम,गुलज़ार,फलां का ,
अदब की दुनिया में बड़ा मक़ाम है ।
लेकिन गुस्ताख़ी मुआफ़ करना हुज़ूर ,
क्या इन पर लगें मेरे जितने इलज़ाम है ।

खेलता हूँ लफ़्ज़ों की आँख मिचोली रोज़,
पता ही नहीं चलता सहर है या शाम है ।
जश्न-ए-रेख़्ता, तो ऊँचे लोग करते हैं साहब ,
अपने लिए तो नुक्कड़ ही जश्न-ए-आम है ।

मेरी ज़िंदगी का यही दिलकश निज़ाम है ,
होंठो पे सदा सदाक़त का जाम है ।
एक नशेमन खो गया भी तो क्या ,
गुलिस्तां में हाज़िर गुल तमाम हैं ।

मै नहीं जानता कि सफ़र का क्या अंजाम है ,
बस खबर इतनी पक्की है कि अदबी पैगाम है ।
इन अल्फाज़ो के जादूगरों में शामिल ,
अब मेरा भी नाम है ।

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@Shaheer_Rafi
ek baat to pakki hai
Tumhare shabdo me kaafi dum hai
Likhe hue tumhare kai lafzo me
Dariye se bhi jyada gam hai

Nice post brother
Keep writing

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@Shaheer_Rafi and @Ravi_Vashisth ab to maza aa rha hai dono ke alfaaz padh kr… :smiley:

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Thanks bhai

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